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भाभी सेक्स हिंदी कहानी में पढ़ें कि कामुक्ताज डॉट कॉम पर मेरी सेक्स स्टोरी पढ़कर एक भाभी मेरे यहां जैसलमेर घूमने आई. मैं उसकी प्यासी चूत का गाइड कैसे बना, मेरी स्टोरी में जानें!

कामुक्ताज डॉट कॉम के सभी पाठकों को मेरी तरफ से खम्मा घणी! इसके साथ ही बड़े बड़े बूब्स और मोटी गांड वाली सभी भाभियों को मेरे खड़े लंड की तरफ से 21 तोपों की सलामी!

मुझे विश्वास है कि जो भी मेरी भाभी सेक्स हिंदी कहानी को पढ़ेगी, अपनी चूत में उंगली जरूर करेगी और मेरा लंड लेना चाहेगी. लड़के भी पक्का मेरी कहानी की नायिका के नाम की मुठ मारकर अपने लौड़े को शांत करेंगे!

मैं अजय, 24 साल का गबरू जवान, जोधपुर (राजस्थान) का रहने वाला हूँ। मैं 2018 से कामुक्ताज डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ और इससे पहले मेरी एक कहानी प्रकाशित हो चुकी है
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आप सबने मुझे ढेर सारा प्यार दिया जिसके लिए आप सभी का मैं बहुत बहुत शुक्रगुजार हूं. मगर दोस्तो, मुझे जिसकी जरूरत है वो है इस कुदरत की बनायी सबसे नायाब चीज़ जिसे हम चूत कहकर बुलाते हैं.

चूत एक घाटी है, जहाँ घुसती केवल पुरुष की लाठी है.
चूत एक आसमान है, जहाँ मिटता खड़े लंड का झूठा गुमान है.
चूत एक अद्वितीय लोक है, जहाँ खड़ा लंड सिधारता परलोक है.
चूत एक अज़ब सा शहर है, जहाँ लंड के रस की बहती नहर है!

इसी चूत के लिए मैं पिछले तीन साल से तड़प रहा था लेकिन कहते हैं न कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। हां, बस आपकी नीयत साफ होनी चाहिए. ऊपर वाला जब भी देता है, छप्पर फाड़ कर देता है और कभी लेता है तो गांड फाड़ कर लेता है!

चूत और लंड का रिश्ता सिर्फ और सिर्फ चुदाई का हो सकता है, ये दोनों कभी दोस्त नहीं हो सकते। चुदाई एक प्राकृतिक चीज है, यह शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक प्रकिया भी है।

अगर चुदाई प्यार और सहमति से हो तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। जब एक आदमी बाहर की बिरयानी खा सकता है तो एक औरत कब तक घर की रोटियां ही सेकेगी?

घर से बाहर सेक्स कोई आदमी करे तो वो मर्द कहलाता है और औरत करे तो समाज उसे रंडी कहकर बुलाता है, ऐसा क्यों? आखिर औरतों का भी दिल करता होगा कि कभी बाहर का स्वाद चखें, किसी अजनबी लंड के मजे लें? आखिर इसमें गलत भी क्या है?

भारत की 90% औरतें या तो अपने पति के लंड से या उनके द्वारा की जाने वाली चुदाई से खुश नहीं हैं. मगर वो समाज के डर से कुछ नहीं कर पातीं. मगर कुछ थोड़ी हिम्मत कर लेती हैं और खुलकर मजे लेती हैं. मैं तो कहता हूं कि मजा लेना भी चाहिए. जवानी केवल एक बार ही आती है.

आज मैं आपको जिस घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ वो मेरे लिये जिंदगी की ओर से किसी खूबसूरत तोहफे जैसा है. ऐसा तोहफा शायद सिर्फ बहुत ही किस्मत वालों को मिलता है.

मेरी कहानी की नायिका है- प्रीति भाभी!
जी हां, हम सबकी प्यारी भाभी प्रीति जी। नाम पढ़ते ही सबके लंड खड़े हो गए न? और हों भी क्यों न, प्रीति भाभी कुदरत का करिश्मा जो है और कामुक्ताज डॉट कॉम की सबसे उम्दा लेखक भी है।

मुझे लगता है कि प्रीति को भगवान ने अपने यहां लॉकडाउन रखकर बड़ी फुर्सत में बनाया है. उसे देखकर लगता है कि भगवान ने खुद अपने हाथों से प्रीति के हुस्न को सजाया है. उसके एक एक अंग को बड़ी बारीकी से तराशा है.

मगर हमें तो जैसे गूगल से डाउनलोड करके धरती पर भेज दिया हो. भगवान ने हम जैसे मुस्टंडों को बनाने में जरा भी मेहनत नहीं की होगी. अगर मैं प्रीति भाभी के हुस्न को लफ़्ज़ों में बयां करना चाहूं तो कुछ ऐसे होगा-

एक लाइन में क्या तारीफ लिखूं प्रीति की, पानी भी देखे उसे तो प्यासा हो जाए.
प्रीति के सिर पर जो बाल हैं, वो मायाजाल है.
उसके होंठो का जो रस है, वही सोमरस है.
उसके सीने पर जो आम हैं, वही चार धाम हैं.

सोचता रहता हूं कि प्रीति की हर कागज पर तारीफ करूँ, फिर ख्याल आया कि कहीं पढ़ने वाला भी उसका दीवाना न हो जाये. दोस्तो, जब मैंने प्रीति की पहली कहानी
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पढ़ी थी, मैं उसी दिन से उसका डाई हार्ड फैन हो गया था और कहानी पढ़कर उसे एक ईमेल किया था. उस ईमेल का कुछ हिस्सा मैं आप सब के साथ शेयर करना चाहूंगा.

मैं- प्रीति, आओ हम खेलेंगे.
प्रीति- नहीं, आप हमको पेलेंगे.
मैं- यही तो प्यार की कसौटी है.
प्रीति- नहीं, मेरी चूत अभी छोटी है.

“देखो मेरे दिल में आपके लिए कितना प्यार भरा है?”
प्रीति- नहीं, मुझे पता है आपका बहुत देर से खड़ा है.
मैं- प्रीति, यह आपके हुस्न को और निखार देगा.
प्रीति- जी नहीं, यह मेरी चूत और गांड दोनों ही फाड़ देगा.

मैं अपने ख्वाबों की मल्लिका से मिलना चाहता था लेकिन यह सब हकीकत में नामुमकिन के जैसे लग रहा था. फिर किसी महान आत्मा ने कहा है कि किसी को शिद्दत से चाहो तो सारी कायनात आपको उससे मिलाने की कोशिश में जुट जाती है.

दोस्तो, मैंने भी बड़ी शिद्दत से प्रीति को चाहा था. वैसे भी अगर लंड और चूत का मिलना लिखा हो तो रास्ते खुद ही निकल आते हैं. मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

एक दिन प्रीति का मेरे पास ईमेल आया जिसमें उसने लिखा था- अजय, तुम बहुत अच्छा लिखते हो, क्या तुम मेरे लिये एक कहानी लिख सकते हो? अगर मुझे तुम्हारी लिखी हुई कहानी पसंद आई तो मैं तुमसे मिलने के लिए राजस्थान भी आ सकती हूँ.

शायद यहीं से हम दोनों के मिलन की नींव रखी गयी थी. मैंने उसके लिए 2 कहानियां लिखीं जो उसे बहुत पसंद आईं और वो बोली- कभी मौका मिला मुझे तो मैं तुमसे मिलने जरूर आऊंगी।

यह बात अक्टूबर 2019 के पहले हफ्ते की है.
मेरे पास प्रीति का ईमेल आया- अजय, मैं दिसंबर में राजस्थान घूमने के बारे में सोच रही हूँ और इसी बहाने तुमसे मिलना भी हो जाएगा. तो क्या तुम मुझे गाइड करोगे?
मैं- प्रीति जी, आप पूछ रही हो या बता रही हो? (मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि वो सच में मुझसे मिलने आ रही है)
प्रीति- अरे सच में राजस्थान आ रही हूं मैं, क्योंकि मुझे वहां का कल्चर बहुत पसंद है.

उसने आगे लिखा था- खासतौर से मैं चाहती हूं कि तुम मुझे जैसलमेर के रेत के टीलों में कैमल सफारी और नाईट कैम्प के लोक संगीत दिखाने के लिए ले जाओ और पूरा जैसलमेर दिखाओ. हम खूब मजा करेंगे.

मैं- प्रीति जी, आपका आदेश सिर आंखों पर। आप भी जिंदगी भर राजस्थान की मेहमान नवाजी को याद करोगी और मुझे उस दिन का बेसब्री से इंतजार रहेगा जब आप यहां आयेंगी.

दोस्तो, अब तो 2 महीने भी मुझे 2 साल से ज्यादा लग रहे थे और इन 2 महीनों में मैंने कसरत करना शुरू कर दिया था ताकि जब पहली बार प्रीति मुझसे मिले तो मुझे देखते ही इम्प्रेस हो जाए.

मैं तो पहले से ही उस पर फिदा था. बस सोच रहा था कि काश उसका दिल भी मुझ पर आ जाये. इसके लिए मैं अपने आप को बेहतर तरीके से पेश करना चाहता था. इसलिए अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहा था.

जैसे जैसे दिसंबर का महीना नजदीक आ रहा था, मेरे दिल की धड़कनें बढ़ रही थीं. मैं रोज रात ख्वाबों में अपनी अप्सरा (प्रीति) से मिलता था. जब आपका ख्वाब हकीकत में बदलने वाला हो तो इससे अच्छा तोहफा क्या हो सकता है?

मैंने सब कुछ प्लान कर लिया कि प्रीति को कहां कहां घुमाना है, उसे कैमल सफारी करवानी है, रात में रेत के टीलों पर घुमाने के लिए लेकर जाना है.

फिर आखिरकार वो दिन आ ही गया जब वो हुस्न-परी खुद चल कर मेरे पास आ रही थी. मैं प्रीति को लेने के लिए 1 घंटा पहले ही स्टेशन चला गया था. जब ट्रेन स्टेशन पर आकर रुकी तो उसने मुझे ट्रेन से नीचे उतर कर कॉल किया.

प्रीति- अजय तुम कहाँ हो? मैं स्टेशन पहुचं गयी हूँ.
मैं- स्टेशन पर ही हूँ, तुम कहाँ हो? दिख नहीं रही हो.

अचानक से मुझे प्रीति अपना हाथ हिलाते हुए दिख गयी. उसने भी मुझे देख लिया और खुश होते हुए मेरे पास आकर मुझे अपने गले से लगा लिया. एक पल के लिए तो मैं वहीं ठहर सा गया था.

मुझे लगा कि सारी कायनात ने मुझे अपने गले से लगा लिया हो और जैसे राजस्थान की गर्मी में ठंडी हवा का झोंका आया हो। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं भगवान का शुक्रिया अदा करूँ या प्रीति का?

मैंने दोनों का ही शुक्रिया किया. भगवान का शुक्रिया तो इसलिए कि उन्होंने इस करिश्मे को मेरे लिए धरती पर भेजा और प्रीति का शुक्रिया इसलिए कि वो खुद चलकर मेरे पास आयी.

उसका फिगर लगभग 34-28-36 का होगा. उस दिन उसने प्लाज़ो पहन रखा था जिसमें वो एकदम पंजाबन कुड़ी लग रही थी. इधर प्रीति को देखकर मेरे दिल में बल्ले बल्ले हो रही थी.

मेरा लंड तो पैंट के अन्दर बहुत टाइट हो गया था और इस बात को प्रीति ने भी नोटिस कर लिया था. बात करते हुए उसकी नजर भी एक दो बार मेरी पैंट पर जा चुकी थी. मैं उसके बदन को स्कैन करने में लगा हुआ था.

मैंने पूछा- कहिये मैडम? सफर में कोई परेशानी तो नहीं हुई?
प्रीति- नहीं, अब तक तो कोई खास परेशानी नहीं हुई. अब जब आपके शहर में हैं तो उम्मीद है कि अब तो परेशानी का सवाल ही नहीं होना चाहिए.

मुस्कराते हुए मैंने भी कहा- जी बिल्कुल, हम अपने मेहमानों का खास ख्याल रखते हैं और जब मेहमान ही ख़ास हो तो फिर जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. आप चिंता न करें. आपको जैसलमेर की ये ट्रिप लम्बे समय तक याद रहेगी.

इस बात पर वो भी मुस्करा दी. उसके पास दो बैग थे. एक मैंने थाम लिया. हम दोनों साथ में चलने लगे. उसकी चाल में एक नजाकत थी. एक अदा थी. उसको देखे बिना उसके बगल से शायद ही कोई गुज़र पाये.

वहां पर आने-जाने वाले लोग प्रीति को घूर घूर कर देख रहे थे और जैसे मुझे चिढ़ा रहे हों कि लंगूर के मुहं में अंगूर दे दिया.
.सच में बहुत गुस्सा आ रहा था मुझे लोगों पर, जब वो प्रीति को घूर घूर कर देख रहे थे.

खैर, हम स्टेशन से बाहर निकले और बाइक से होटल की तरफ चल दिये. प्रीति ने पीछे से मेरी बांहों में अपने हाथ डाल दिये तो मैं जानबूझकर बाइक को धीरे चलाने लगा।

जब उसने मेरी कमर में हाथ डाले तो लगा जैसे सारी दुनिया का प्यार भगवान मेरे ऊपर ही बरसा रहा है. उसके कोमल हाथों का स्पर्श मेरे तन बदन में जैसे शहद घोल रहा था.

लंड तो मेरा पहले से ही उसको देखकर खुशी में झूम रहा था. अब जब उसके हाथ मेरी पीठ और पेट को छू रहे थे लंड ने उछल कूद भी शुरू कर दी थी. काश … कि वो मेरी जांघों पर हाथ रख ले, मैं मन ही मन कुछ ऐसे ही दुआ कर रहा था.

उसके साथ बाइक पर चलते हुए वो स्टेशन से होटल की दूरी और ज्यादा छोटी लग रही थी. मैं जितना धीरे हो सकता था उतना धीरे चला रहा था. वो भी कुछ नहीं बोल रही थी.

थोड़ी देर बाद हम होटल पहुँच गए. अपने रूम में प्रीति ने अपना सामान रखा और आराम करने लगी. मैं उसके लिए खाना लेकर आया. फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया और प्लान किया कि 4 बजे बाइक से जैसलमेर घूमने के लिए निकलेंगे.

दोस्तो, यहां से शुरू होने वाली है उस हुस्न परी की चुदाई की कहानी. प्रीति को मैं कहां-कहां घुमाने ले गया और उसको मैंने कैसे गर्म किया. फिर उसको रेत के टीलों पर ले जाकर कैसे उसकी चुदाई की?

ये सब जानने के लिए आपको भाभी सेक्स हिंदी कहानी के अगले भाग का इंतजार करना होगा. तब तक आप मुझे अपने ईमेल के जरिये बतायें कि आपको कहानी की शुरूआत कैसी लग रही है?

मुझे मेरी ईमेल पर मैसेज करें अथवा कमेंट बॉक्स में भी लिख सकते हैं. मुझे आप लोगों के मैसेज का इंतजार रहेगा. भाभी सेक्स हिंदी कहानी में आपको आगे बहुत मजा आने वाला है. कामुक्ताज डॉट कॉम पर बने रहें.
मेरा ईमेल है
[email protected]

भाभी सेक्स हिंदी कहानी का अगला भाग: जैसलमेर के रेत के टीले- 2

Related Tags : इंडियन भाभी, कामवासना, गैर मर्द, देसी कहानी, सेक्सी कहानी
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