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दार्जिलिंग की लड़की को दिल्ली में चोदा

सेक्सी ऑफिस गर्ल की चुदाई कर डाली मैंने. मैंने एक सेलगर्ल रकही ये सोच के कि सेल बढ़ेगी लड़की को देख के ग्राहक आयेंगे. शायद मेरा काम भी चल जाए.

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम अशोक है; छह फीट लंबा हूं और दिखने में ठीक-ठाक हूँ. मेरे लंड का साइज छह इंच हैं. मेरा खुद का मोबाइल का छोटा सा बिजनेस है.

मैंने कैसे एक दार्जिलिंग की एकदम कुंवारी लड़की को चोदा, इस सेक्सी ऑफिस गर्ल की चुदाई कहानी मैं आपको उसी चुदाई के बारे में बताना चाहता हूं.
चूंकि ये मेरी पहली सेक्स कहानी है तो गलती होना स्वाभाविक है. आपसे निवेदन है कि अगर आपको कोई गलती दिखे तो मुझे माफ कीजिएगा.

मेरी ये सेक्स कहानी एकदम सच्ची कहानी है. इसमें कोई भी झूठ नहीं है.

एक दिन मैं अपनी शॉप में बैठा था तो मैंने सोचा कि किसी लड़की को काउंटर सेल्स गर्ल के लिए रख लेता हूं, तो शायद मेरी शॉप की सेल बढ़ जाएगी और हो सकता है कि मेरा अपना पर्सनल काम भी चल जाए.

इसके लिए मैंने एक एड लिख कर अपनी शॉप के बाहर ही बोर्ड टांग दिया. उसके बाद कई लड़कियां आईं, लेकिन मुझे कोई जंची नहीं.

तीसरे दिन मैंने देखा कि एक लड़की मेरे पास आकर जॉब के लिए पूछ रही है.
उसको देखते ही मेरे लंड ने सलामी देनी शुरू कर दी. अब जब नीचे वाले बाबूलाल ने ही हां कह दी थी, तो मैं कौन होता था ना बोलने वाला. सैलरी की बात करके मैंने उसे कल आने को बोल दिया.

मैं आपको उसका माल का नाम बता देता हूँ ताकि आपके आइटम को भी मजा आना शुरू हो जाए. उसका नाम मौली था.

उस छमियां के लिए मैं अगर एक ही शब्द में बोलूं तो वो कयामत थी. जीन्स और टॉप पहने हुए इतनी मस्त लग रही थी मानो अभी हां बोले, तो साली को अभी लेटा कर चोद दूं. एकदम गोरी चिकनी, मम्मों का नाम लगभग 34 इंच होगा, कमर 26 की और गांड लगभग 36 इंच की एकदम तोप सी तनी हुई.

मौली के नैन नक्श तो ऐसे थे, मानो रम्भा नाम की अप्सरा इंद्र का दरबार छोड़ कर मेरे बाबूलाल की सेवा के लिए आ गई हो.
बस आप यूं समझो कि उसे देखने से ही मजा आ गया था.

अगले दिन जब वो काम पर आई, तो मैं उस समय उसके बारे में सोचते हुए ब्लू फिल्म देख रहा था.

वो जैसे ही आई, तो मैंने फिल्म बंद कर दी और उसे काम के बारे में समझाने लगा.
मौली ने डीप गले का सूट पहना हुआ था, जिससे मुझे उसके मम्मों के थोड़े से दर्शन हो रहे थे.

तभी उसकी नजर मुझ से टकराई और उसको समझ में आ गया कि मैं उसके मम्मों को देख रहा था.
मौली ने हल्की सी मुस्कान दी और मैं समझ गया कि लाईन क्लियर है.

दिन भर बातों में उसने बताया कि वो यहां दार्जिलिंग से नई नई आयी है … और अभी अकेली रहती है.

‘अकेली रहती है ..’ सुनकर मेरे छह इंच के बाबूलाल ने आतंक मचाना शुरू कर दिया था.

शाम को में दुकान को बंद करके जाने लगा तो मैंने उससे पूछा- मौली, क्या मैं तुमको घर तक छोड़ दूं?
मौली ने भी हां बोल दिया.

रास्ते में मैंने बहुत बार ब्रेक मारे ताकि उसके मम्मों की गर्मी मिल सके और उसके साथ मेरी लाइन क्लियर हो सके.
वो भी शायद इसमें मुझे साथ दे रही थी.

जब मैंने उसे छोड़ा, तो उसने मुझे चाय पीने का ऑफर दिया.
मैंने भी मौका नहीं छोड़ा और हां बोल दिया.

वो चाय बनाने से पहले वॉशरूम गई और उसके बाद मेरे लिए चाय बनाकर लेकर आई.
चाय पीते पीते मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैंने थोड़ी सी चाय अपनी पैन्ट पर गिरा दी और ऐसे एक्टिंग की, जैसे मेरी जांघ के पास से जल गया हो.

वो जल्दी से एक कपड़ा लाकर मेरी पैन्ट को साफ करने लगी, लेकिन मैं आराम ना आने की एक्टिंग करने लगा.

फिर उसने जल्दी से टॉवेल लाकर मुझे दी और वॉशरूम की तरफ इशारा करके पैन्ट खोलने के लिए बोला.

मैं जल्दी से वॉशरूम में गया और टॉवेल पहनने लगा. तभी मुझे उसकी पैंटी दिखाई दी, जिसने मेरे लंड को खड़ा कर दिया.
मैंने टॉवेल तो लपेट लिया लेकिन वो मेरे लंड के पास से थोड़ा उभरा हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था.
खड़ा लंड उसने भी नोटिस कर लिया था.

मैंने उससे पूछा- जले हुए पर लगाने के लिए कोई क्रीम है क्या?
उसने मना कर दिया और पूछने लगी- क्या ज्यादा जल गया?

मैंने कहा- हां यार ऐसा लग रहा है कि कुछ ज्यादा जल गया है. शायद मुझे सही से दिख नहीं रहा क्योंकि वॉशरूम में लाइट कम है.
उसने मुझसे कहा कि ऐसा क्या करना चाहिए, जिससे ये ठीक हो जाए?
मैंने कहा- कोई भी क्रीम हो या तेल हो तो चलेगा.

मौली ने झट से सरसों का तेल लाकर दे दिया.

मैं तेल लेकर वॉशरूम में गया लेकिन थोड़ी देर बाद निकल कर बोला- मैं नहीं लगा पा रहा. जलन ज्यादा हो रही है.
उसने कहा- लगाना तो पड़ेगा ही, जिससे ये ठीक हो जाए.

मैंने दर्द की एक्टिंग करते हुए कहा कि अब ज्यादा जलन हो रही है.
उसने कहा- मैं लगा दूं?

वाह मेरी जान … यही तो मैं सुनना चाहता था. मेरी तो लॉटरी लग गई थी.

लेकिन मैंने एक्टिंग की- तुम बुरा तो नहीं मानोगी ना?
वो बोली- नहीं मानूंगी.

मैं झट से लेट गया और उसने थोड़ा सा तेल हाथ में लिया और टॉवेल ऊपर करके लंड के पास लगाने लगी.

अभी उसका हाथ मेरे लंड को टच नहीं कर रहा था.

मैंने कहा- थोड़ा ऊपर जल रहा है.

वो थोड़ा शर्माई और थोड़ा सा तेल और लेकर ऊपर को हाथ डालने लगी.
तभी उसका हाथ मेरे लंड को टच करने लगा. वो भी मेरे खड़े लंड को हाथ लगाते ही समझ गई कि मैं एक्टिंग कर रहा था. फिर भी उसने तेल लगाना चालू रखा.

मैंने कहा- थोड़ा अन्दर भी जला है. क्या वहां भी लगा दोगी?
उसने शर्माते हुए कहा- हां लगा दूंगी.

ये सुनते ही मैंने अपना टॉवेल हटा दिया. मेरा लंड फुंफकार मारते हुए खड़ा था, जिसे देख कर उसकी आंखें बड़ी हो गईं और वो थोड़ा शर्माने लगी.

मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और उसको तेल लगाने के लिए बोला.

वो धीरे धीरे से मेरे लंड की मालिश कर रही थी. मैंने धीरे से एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया, उसने मुझे कुछ नहीं बोला.

मैं समझ गया कि वो भी गर्म हो चुकी है. मैंने उसको धीरे से अपनी ओर कमर पकड़ कर खींचा तो वो मेरी छाती पर सर रखकर लेट गई.

मैंने उसकी तारीफ़ करना शुरू किया और मौली को बताया कि मैं पहले दिन ही तुमको पसंद करने लगा था.
वो बोली- हां, मैं भी आपको पसंद करती हूं.

अब मैं खड़ा हुआ और मैंने अपने ऊपर के सारे कपड़े खोल दिए और उसका शर्ट उतार दिया.
अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और सलवार में थी.
उसके मम्मे एकदम टाइट थे.

मैंने जल्दी से उसकी ब्रा भी खोल दी.
जैसे ही मैंने उसकी ब्रा खोली, वो और ज्यादा शर्माने लगी.
उसे मैंने समझाया कि जान ये शर्माने का टाइम नहीं है, एन्जॉय करने का टाइम है.

मैंने फिर से उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया और उसके प्यारे प्यारे होंठों पर किस करने लगा.

मुझे सेक्स का बहुत सवार हो रहा था. मैंने 2 मिनट तक उसके होंठों को किस किया और उसके मम्मों को दबाता रहा.

अब वो भी मदहोश हो रही थी और मेरा साथ देने लगी थी.
मैंने उसे लेटाया और एक झटके से उसकी सलवार और पैंटी दोनों खोल दीं.
उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था. ऐसा लग रहा था मानो जैसे उसने आज ही चूत के बाल साफ़ किए हों.

मैंने तो सीधे ही उसकी चूत की फांकें खोल दीं और अपनी जीभ उसमें घुसा दी.
वो पूरी तरह से तड़प उठी और उसने उसी पल मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत में दबा दिया.

मैं चिकनी चूत चाटने में लग गया.

मगर एक मिनट में ही उससे रहा नहीं जा रहा था. मगर मैं उसको अभी और तड़पाना चाहता था.

अगले ही पल में खड़ा हुआ और 69 की पोजिशन में उसकी चूत चाटने लगा.
मेरी पोजिशन ऐसी थी कि मेरा लंड उसके होंठों को टच करने लगा.

मैंने उसे इशारा किया कि वो मेरे लंड को अपने मुँह में ले.
उसने ऐसा ही किया.
लगता था मानो जैसे वो आज कुछ भी करने के लिए तैयार थी.

थोड़ी देर तक हम इसी तरह ओरल सेक्स का मजा लेते रहे.
उसके बाद मैंने उसके सर के नीचे से तकिया हटाया और उसकी गांड के नीचे लगा दिया.
फिर अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर फिराने लगा.

अब उससे रहा नहीं जा रहा था.
वो बोली- प्लीज अशोक, मुझे अब मत तड़पाओ … अन्दर घुसा दो प्लीज.

उसके मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपने लंड को उसकी चूत में पेल दिया.

जैसे ही मैंने एक झटका मारा, मेरा सुपारा उसकी चूत में घुस गया और उसकी हल्की सी चीख निकल पड़ी.

मैंने फिर थोड़ा आराम से एक और झटका मारा, तो मेरा आधा लंड उसके अन्दर तक घुस गया.
उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और मैं उसके दर्द को देख कर रुक गया.

लेकिन वो शायद कुछ और चाहती थी.
अगले ही पल उसका हाथ मेरी गांड पर था, जैसे वो चाहती हो कि तुम रुके क्यों … और तेज़ी से झटके मारो.

ये समझते ही सोचने के लिए क्या बाकी रह गया था. मैंने भी अपनी स्पीड तेज़ कर दी और अपनी स्पीड चौथे गियर में डाल दी.

लगभग पांच मिनट बाद मैं डिस्चार्ज हो गया और मेरा शरीर निढाल होकर उसके ऊपर गिर पड़ा.
सेक्सी ऑफिस गर्ल की चुदाई संपन्न हो गयी थी.
वो भी तृप्त होकर मेरे बालों में हाथ घुमाने लगी थी. मुझे सच में बहुत मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर तक ऐसे ही आराम करने के बाद मैंने उसको मालिश करने के लिए कहा, तो उसने मेरी पूरी बॉडी की अच्छे से मालिश की.
वो मेरे कंधों को बहुत अच्छे से दबाने लगी और फिर मुझे सीधा लेटाकर मेरे लंड पर अपना शरारती हाथ फेरने लगी.

मेरा भी लंड उसके हाथ घुमाने से फिर से खड़ा हो गया.

जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ, उसने लंड को अपने मुँह में डाल लिया और अपने होंठों से मेरे लंड की मसाज करने लगी.
मैं आपको बता नहीं सकता उस फीलिंग में आनन्द क्या था. मैं अपने आपको सातवें आसमान में उड़ता हुआ महसूस कर रहा था.

कुछ देर बाद मैंने उसे लेटा दिया और मैंने उसकी मालिश की.

मैंने उसको उल्टा लेटा दिया और उसके ऊपर लेट कर उसके कानों के आस पास किस करने लगा.
उसको बहुत गुदगुदी हो रही थी और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर मैंने ऐसे ही उसकी टांगें चौड़ी की और उसकी चूत में अपनी उंगली डाल कर तेज़ तेज़ अन्दर बाहर करने लगा.
मौली को दुबारा से पहले जैसा जोश चढ़ने लगा.

कुछ पल बाद मैंने अपने लंड को उसके मुँह में डाल दिया, जिससे मेरा जोश दुगना हो गया.

फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड पेला और झटके मारने शुरू कर दिए.

इस बार डिस्चार्ज होने की उसकी बारी थी. थोड़ी देर में ही उसने मुझे टाइट से पकड़ लिया और डिस्चार्ज हो गई.
मुझे उसकी आंखों में सुकून दिख रहा था, जिससे मेरी रफ़्तार तेज हो गई और मैं भी झड़ गया.

इस तरह से मौली मेरी अंकशायिका बन गई थी.

दोस्तो मेरी ये सेक्सी ऑफिस गर्ल की चुदाई आपको कैसी लगी? मुझे कमेंट करके जरूर बताएं. आपके कमेंट का मुझे बेसब्री से इंतज़ार रहेगा. इसमें आपको क्या अच्छा लगा और क्या बुरा लगा, वो जरूर बताना ताकि मेरी अगली कहानी इससे भी ज्यादा दिलचस्प हो.

Related topics कामवासना, चूत चाटना, देसी गर्ल, लंड चुसाई, हिंदी एडल्ट स्टोरीज़
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